पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया क्षेत्र में लगातार हो रही मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। एक बयान में दावा किया गया कि पिछले एक दशक में हाथियों के हमलों में 47 लोगों की जान जा चुकी है। इसे लेकर राज्य सरकार और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं।
बयान में कहा गया कि यदि हाथी कॉरिडोर का प्रभावी विकास, समय पर चेतावनी प्रणाली, प्रभावित गांवों में सुरक्षा व्यवस्था, अतिक्रमण नियंत्रण और त्वरित राहत तंत्र को मजबूती से लागू किया जाता, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।
साथ ही सरकार से मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए ठोस और दीर्घकालिक योजना लागू करने, प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा और स्थायी समाधान उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
मानव-हाथी संघर्ष झारखंड के कई वन क्षेत्रों में लगातार चुनौती बना हुआ है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई से ही इस समस्या का समाधान संभव है।












